पश्चिम बंगाल भारत का नया औद्योगिक केंद्र बन गया है
भारत रक्षा एवं एयरोस्पेस स्वदेशीकरण शिखर सम्मेलन 2026
निजी रक्षा विनिर्माण, यूएवी नवाचार और रणनीतिक एयरोस्पेस कॉरिडोर को गति देना।
रणनीतिक जानकारी देखें →पश्चिम बंगाल में एक बड़े पैमाने पर औद्योगिक क्रांति की शुरुआत हो रही है, जिसके लिए गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) और यन्त्रा इंडिया लिमिटेड (यीआईएल) ने पांच ब्राउनफील्ड विस्तार परियोजनाओं की घोषणा की है। रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने इन परियोजनाओं के लिए आधार पत्थर रखा, जिससे भारत के जहाज निर्माण और रक्षा उत्पादन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हुआ है।
इन विस्तार परियोजनाओं के तहत, जीआरएसई को अपनी निर्माण क्षमता और सुविधाओं को बढ़ाने का अवसर मिलेगा, जिससे वह समुद्री बलों और अन्य रक्षा स्टेकहोल्डर्स की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा कर सकेगा। कंपनी ने रायचक में दो छोटे शिपयार्ड और 32 एकड़ के नदी किनारे संपत्ति के लिए लीज समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके लिए ₹2,500 करोड़ से अधिक का निवेश किया जाएगा।
रायचक सुविधा को एक जहाज निर्माण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें 200 मीटर की सूखी डॉक, स्लिपवे, लॉन्चिंग पैड, जेट्टी, और ब्लॉक फैब्रिकेशन सुविधाएं होंगी। इससे जीआरएसई को 200 मीटर तक के युद्धपोत और 60,000 DWT तक के वाणिज्यिक जहाजों का निर्माण करने की अनुमति मिलेगी। शालीमार में 4 एकड़ के टिम्बर पोंड सुविधा को लगभग ₹100 करोड़ के निवेश से मध्यम आकार के जहाज निर्माण और मरम्मत के लिए पुनर्जीवित किया जाएगा, जबकि किडरपोरे डॉक्स में डामोदर सुविधा को लगभग ₹70 करोड़ के निवेश से मध्यम आकार के जहाज मरम्मत और इलेक्ट्रिक फेरी और अन्य छोटे जहाजों के निर्माण के लिए दिया जाएगा।
भारत रक्षा एवं एयरोस्पेस स्वदेशीकरण शिखर सम्मेलन 2026
निजी रक्षा विनिर्माण, यूएवी नवाचार और रणनीतिक एयरोस्पेस कॉरिडोर को गति देना।
रणनीतिक जानकारी देखें →यीआईएल की नई सुविधाएं इशापुर में भारतीय धातुविज्ञान और रक्षा उत्पादन को मजबूत करेंगी, जिससे आयात निर्भरता कम होगी और रक्षा, रेलवे और रणनीतिक क्षेत्रों को समर्थन मिलेगा। ₹277.59 करोड़ के 3,000 टन भारी ड्यूटी हाइड्रोलिक ओपन डाई फॉर्जिंग प्रेस को 2,650 टन के पुराने प्रेस की जगह लेगा, जिससे गन बैरल, एम्यूनिशन कंपोनेंट्स, और भारी रक्षा फोर्जिंग्स का निर्माण होगा। ₹473.84 करोड़ के रेडियल फॉर्जिंग प्लांट से सुपर एलॉय फोर्जिंग्स, एयरियल बम ट्यूब, ऑर्डनेंस हार्डवेयर, रेलवे एक्सल, और न्यूक्लियर रिएक्टर कंपोनेंट्स का निर्माण होगा।
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने पश्चिम बंगाल में उद्योग के विस्तार पर अपनी खुशी व्यक्त की, जिसमें उन्होंने कहा कि इस आत्मविश्वास का आधार राष्ट्रीय सुरक्षा है। उन्होंने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री को बधाई दी, जिन्होंने बंगाल को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ाया। रक्षा मंत्री ने जीआरएसई की नौसेना और वाणिज्यिक प्लेटफॉर्म के निर्माण में विस्तार के लिए अपनी विशेषज्ञता का उल्लेख किया, जिन्होंने 800 से अधिक प्लेटफॉर्म्स का निर्माण किया है।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने जीआरएसई के नेतृत्व की प्रशंसा की, जिन्होंने बंगाल को पुनर्निर्मित करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि जब भारत 2047 तक विकसित हो जाएगा, तो पश्चिम बंगाल भी विकसित हो जाएगा।
इन परियोजनाओं से, भारत जहाज निर्माण और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के करीब पहुंच गया है। पश्चिम बंगाल एक बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है, जिससे देश के रक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा।
पश्चिम बंगाल के लिए एक नया युग
इन विस्तार परियोजनाओं ने पश्चिम बंगाल के औद्योगिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है, जिससे राज्य एक बड़े पैमाने पर जहाज निर्माण और रक्षा उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। इन निवेशों से ₹2,500 करोड़ से अधिक के निवेश से हजारों नए रोजगार पैदा होंगे और क्षेत्र में आर्थिक विकास होगा।
आत्मनिर्भर निर्माण को मजबूत करना
यीआईएल की नई सुविधाएं इशापुर में भारतीय धातुविज्ञान और रक्षा उत्पादन को मजबूत करेंगी, जिससे आयात निर्भरता कम होगी और रक्षा, रेलवे और रणनीतिक क्षेत्रों को समर्थन मिलेगा। ₹277.59 करोड़ के 3,000 टन भारी ड्यूटी हाइड्रोलिक ओपन डाई फॉर्जिंग प्रेस को 2,650 टन के पुराने प्रेस की जगह लेगा, जिससे गन बैरल, एम्यूनिशन कंपोनेंट्स, और भारी रक्षा फोर्जिंग्स का निर्माण होगा।
रक्षा क्षेत्र को एक बड़ा बढ़ावा
इन विस्तार परियोजनाओं से जीआरएसई को अपनी निर्माण क्षमता और सुविधाओं को बढ़ाने का अवसर मिलेगा, जिससे वह समुद्री बलों और अन्य रक्षा स्टेकहोल्डर्स की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा कर सकेगा। कंपनी ने रायचक में दो छोटे शिपयार्ड और 32 एकड़ के नदी किनारे संपत्ति के लिए लीज समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके लिए ₹2,500 करोड़ से अधिक का निवेश किया जाएगा।
मुख्य बिंदु
- जीआरएसई और यीआईएल की विस्तार परियोजनाएं हजारों नए रोजगार पैदा करेंगी और क्षेत्र में आर्थिक विकास होगा।
- इन निवेशों से जीआरएसई को अपनी निर्माण क्षमता और सुविधाओं को बढ़ाने का अवसर मिलेगा, जिससे वह समुद्री बलों और अन्य रक्षा स्टेकहोल्डर्स की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा कर सकेगा।
- यीआईएल की नई सुविधाएं इशापुर में भारतीय धातुविज्ञान और रक्षा उत्पादन को मजबूत करेंगी, जिससे आयात निर्भरता कम होगी और रक्षा, रेलवे और रणनीतिक क्षेत्रों को समर्थन मिलेगा।
- इन विस्तार परियोजनाओं ने पश्चिम बंगाल के औद्योगिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है, जिससे राज्य एक बड़े पैमाने पर जहाज निर्माण और रक्षा उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
- भारत जहाज निर्माण और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के करीब पहुंच गया है, जिससे पश्चिम बंगाल एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
भारत रक्षा एवं एयरोस्पेस स्वदेशीकरण शिखर सम्मेलन 2026
निजी रक्षा विनिर्माण, यूएवी नवाचार और रणनीतिक एयरोस्पेस कॉरिडोर को गति देना।
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