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भारत की रूसी तेल आयात: वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक रणनीतिक परिवर्तन

🗓️ October 19, 2026 - 01:44 AM IST • ✍️ डिफेंस न्यूज़ इंटेलिजेंस ब्यूरो Read in English
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भारत की रूसी तेल आयात: वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक रणनीतिक परिवर्तन
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भारत की रूसी तेल आयात: एक वैश्विक ऊर्जा बाजार में रणनीतिक बदलाव

भारत की रूसी तेल आयात को वर्तमान स्तर पर बनाए रखने का निर्णय वैश्विक ऊर्जा बाजार में झटके की तरह गिर गया है। इस निर्णय के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी कच्चे तेल पर सीमा शुल्क और करों को वापस लेने का निर्णय लिया है, जिससे भारत को रूसी तेल की खरीद को वर्तमान स्तर पर बनाए रखने की अनुमति मिली है। ट्रंप ने शुक्रवार को जारी किए गए आदेश में लिंडसे ओ. ग्राहम सैनक्शनिंग रूस और ईरान एक्ट के तहत सीमा शुल्क, प्रतिबंध, और करों को वापस ले दिया है। यह कानून 18 सितंबर को हस्ताक्षरित किया गया था, जिसमें रूसी कच्चे तेल और गैस के पांच सबसे बड़े आयातकों पर 100 प्रतिशत तक के सीमा शुल्क लगाने और रूस के छाया फ्लीट पर सैनक्शन लगाने की अनुमति दी गई थी। भारत रूसी समुद्री कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक है, जिसका औसत दैनिक आयात इस वर्ष 1.8 मिलियन बैरल है। सितंबर में भारत ने लगभग 1.82 मिलियन बीपीडी रूसी कच्चे तेल का आयात किया, जो चीन के 1.2 मिलियन बीपीडी से आगे है। विश्लेषकों का अनुमान है कि अक्टूबर में आयात लगभग 1.8-1.9 मिलियन बीपीडी बनाए रखा जाएगा। भारत की कच्चे तेल की सourcing में बदलाव रूस के यूक्रेन पर हमले के कारण हुआ है, जो फरवरी 2022 में हुआ था। पश्चिमी सैनक्शन के बाद कई खरीदारों ने रूसी तेल को छोड़ दिया, जिससे कीमतें काफी कम हो गईं। रूस ने अपने कार्गो को एशिया में सस्ती दरों पर भेजा, जिससे रूसी तेल पश्चिम एशिया और अन्य उत्पादकों के साथ तुलना में एक आकर्षक विकल्प बन गया। भारत ने इस अवसर का लाभ उठाया, जिससे कच्चे तेल की सोर्सिंग में कुछ महीनों में बदलाव हुआ। रूसी तेल भारत के आयात में लगभग 2 प्रतिशत या उससे कम था, लेकिन रिफाइनरों ने तेजी से खरीदारी बढ़ाई, जिससे सस्ते कार्गो ने प्रसंस्करण अर्थव्यवस्था में सुधार किया और आयातित ऊर्जा की लागत को नियंत्रित किया। रूसी तेल ने भारत के कच्चे तेल आयात मिश्रण को根本 रूप से बदल दिया है। सस्ते कार्गो ने पश्चिम एशिया और अन्य उत्पादकों के साथ तुलना में रूसी तेल को एक आकर्षक विकल्प बनाया है। रूस ने ईरान युद्ध के कारण हुए आपूर्ति में हुए नुकसान को पूरा करने के लिए वॉल्यूम को पूरा किया। सितंबर 2026 में, यूरल्स-ग्रेड कच्चे तेल की कीमत के संबंध में ब्रेंट ग्लोबल बेंचमार्क की तुलना में औसतन 23 डॉलर प्रति बैरल की सस्ती दर थी। नवीनतम सीमा शुल्क वापसी के बाद, 9 अक्टूबर को वित्त विभाग ने रूसी डीजल की बिक्री और आयात को वैश्विक बाजार में शामिल करने की अनुमति दी है, जिसमें अमेरिका भी शामिल है, 7 अप्रैल 2027 तक। डीजल वापसी के बाद, नए कानून के पालन की संभावना कम हो गई है, विश्लेषकों ने कहा। यह वापसी भारत के लिए विशिष्ट नहीं है और चीन को भी लाभ पहुंचा सकती है। आदेश के अनुसार, प्रशासन को इसे बाद में फिर से विचार करने की अनुमति है। भारत की रूसी तेल आयात को वर्तमान स्तर पर बनाए रखने की योजना वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक रणनीतिक बदलाव है। इस निर्णय के परिणामस्वरूप वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की संभावना है, और यह देखना बाकी है कि अन्य देश भारत के निर्णय का जवाब कैसे देंगे। भारत की कच्चे तेल की सोर्सिंग में बदलाव एक जटिल राजनीतिक और आर्थिक कारकों के परस्पर क्रिया के परिणामस्वरूप हुआ है। भारत की रूसी तेल आयात को वर्तमान स्तर पर बनाए रखने का निर्णय उसकी ऊर्जा आवश्यकताओं को सुरक्षित करने की क्षमता का प्रमाण है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में आगे के विकास के साथ, भारत की रूसी तेल आयात को वर्तमान स्तर पर बनाए रखने का निर्णय एक महत्वपूर्ण विकास है। इस निर्णय के परिणामस्वरूप वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य पर दूरगामी प्रभाव पड़ने की संभावना है, और यह देखना बाकी है कि अन्य देश भारत के निर्णय का जवाब कैसे देंगे। भारत की कच्चे तेल आयात का भविष्य अनिश्चित है, लेकिन एक बात तय है कि भारत की रूसी तेल आयात को वर्तमान स्तर पर बनाए रखने का निर्णय वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक महत्वपूर्ण विकास है।

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मुख्य बिंदु

  • भारत ने रूसी तेल आयात को वर्तमान स्तर पर बनाए रखने का निर्णय लिया है, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार में झटके की तरह गिर गया है।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी कच्चे तेल पर सीमा शुल्क और करों को वापस लेने का निर्णय लिया है।
  • भारत रूसी समुद्री कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक है, जिसका औसत दैनिक आयात इस वर्ष 1.8 मिलियन बैरल है।
  • भारत ने सितंबर में लगभग 1.82 मिलियन बीपीडी रूसी कच्चे तेल का आयात किया, जो चीन के 1.2 मिलियन बीपीडी से आगे है।
  • विश्लेषकों का अनुमान है कि अक्टूबर में आयात लगभग 1.8-1.9 मिलियन बीपीडी बनाए रखा जाएगा।
  • भारत की कच्चे तेल की सोर्सिंग में बदलाव रूस के यूक्रेन पर हमले के कारण हुआ है, जो फरवरी 2022 में हुआ था।
  • रूस ने अपने कार्गो को एशिया में सस्ती दरों पर भेजा, जिससे रूसी तेल पश्चिम एशिया और अन्य उत्पादकों के साथ तुलना में एक आकर्षक विकल्प बन गया।
  • भारत ने इस अवसर का लाभ उठाया, जिससे कच्चे तेल की सोर्सिंग में कुछ महीनों में बदलाव हुआ।
  • रूसी तेल ने भारत के कच्चे तेल आयात मिश्रण को根本 रूप से बदल दिया है।
  • सस्ते कार्गो ने पश्चिम एशिया और अन्य उत्पादकों के साथ तुलना में रूसी तेल को एक आकर्षक विकल्प बनाया है।
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