आधुनिक युद्ध में भूमि जीत की स्थायी महत्ता
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सीएनसी मशीनें देखें →भूमि जीत की स्थायी महत्ता आधुनिक युद्ध में
भारतीय सेना के मुख्य, जनरल धीरज सेठ ने हाल ही में आधुनिक युद्ध में भूमि जीत की महत्ता को पुनः स्थापित किया है। 2016 के एनडीटीवी रक्षा सम्मेलन में उनके संबोधन में, उन्होंने सीमा नियंत्रण की महत्ता को निर्धारित करने के लिए संघर्ष के परिणाम को उजागर किया। हालांकि युद्ध में प्रौद्योगिकी की भूमिका बढ़ रही है, जनरल सेठ ने दावा किया कि जीत अभी भी भौगोलिक क्षेत्र में मापी जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र की नियंत्रण, सुरक्षा, और रक्षा केवल बल के उपयोग से ही प्राप्त की जा सकती है। सेना के मुख्य ने यह भी कहा कि हर क्षमता को सैनिकों के मैदान पर समर्थन प्रदान करने की क्षमता के अनुसार मूल्यांकित किया जाना चाहिए।
जनरल सेठ ने 16 दिसंबर, 1971 के एक फोटोग्राफ को याद किया, जिसमें बांग्लादेश स्वतंत्रता युद्ध के अंत में पाकिस्तान की आत्मसमर्पण की तस्वीर थी। उन्होंने यह भी कहा कि यह तस्वीर युद्ध का एक परिभाषित क्षण थी, लेकिन यह भी आधुनिक संघर्षों की अनिश्चितता को उजागर करती है। संघर्ष के समयसीमा अब अधिक अनिश्चित हो रहे हैं, जिसमें मध्यम संघर्षों के बीच के अंतराल होते हैं। सेना के मुख्य ने यह भी कहा कि प्रौद्योगिकी लड़ाई को कम कर रही है, लेकिन युद्ध को कम नहीं कर रही है। उन्होंने आधुनिक संघर्षों को 'युद्धों के साथ ब्रेक' के रूप में वर्णित किया, जहां संघर्ष की तीव्रता और प्रकटीकरण बदल सकता है, लेकिन युद्ध जारी रहता है।
जनरल सेठ ने आत्म-निर्भरता की महत्ता को स्थापित किया है, जो सैन्य उपस्थिति और रणनीति को बनाए रखने में मदद करती है। उन्होंने 'आत्म-निर्भरता की प्राचीनता' की चेतावनी दी, जहां आत्म-निर्भर क्षमताएं विकसित होने से पहले ही पुरानी हो जाती हैं। सेना के मुख्य ने सलाह दी कि आत्म-निर्भरता के बारे में सोचना चाहिए, जो यह सुनिश्चित करता है कि भारत को अपनी क्षमताओं को बनाए रखने के लिए बाहरी कारकों से स्वतंत्र होने की क्षमता है।
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कार्बन फाइबर देखें →भारत सरकार ने आत्म-निर्भर रक्षा उत्पादन के मूल्य को बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। 2014-15 में 46,429 करोड़ रुपये से लेकर 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक, देश ने अपनी आत्म-निर्भर क्षमताओं के विकास में महत्वपूर्ण प्रगति की है। हालांकि, सेना के मुख्य की भूमि जीत और आत्म-निर्भरता की ताकत की ताकत सेवा को यह याद दिलाती है कि आत्म-निर्भर क्षमताओं के विकास के साथ-साथ आधुनिक युद्ध की जटिलताओं को समझने की आवश्यकता है। भारतीय सेना को सैनिकों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देनी चाहिए, जबकि अपनी क्षमताओं को आत्म-निर्भरता की प्राचीनता से बचाने के लिए सुनिश्चित करना चाहिए।
मुख्य बिंदु
- आधुनिक युद्ध में भूमि जीत की महत्ता को पुनः स्थापित किया गया है।
- आत्म-निर्भरता की महत्ता को स्थापित किया गया है, जो सैन्य उपस्थिति और रणनीति को बनाए रखने में मदद करती है।
- भारत सरकार ने आत्म-निर्भर रक्षा उत्पादन के मूल्य को बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
- सेना को सैनिकों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देनी चाहिए, जबकि अपनी क्षमताओं को आत्म-निर्भरता की प्राचीनता से बचाने के लिए सुनिश्चित करना चाहिए।
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