भारतीय नौसेना आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही है, स्वदेशी रडार घटक विकास के साथ
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सीएनसी मशीनें देखें →भारतीय नौसेना आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही है स्वदेशी रडार घटक विकास के साथ
भारतीय नौसेना ने रूसी फ्रेगेट एम2ईएम एयर-सーチ रडार के एक महत्वपूर्ण घटक के स्वदेशी विकास के लिए एक टेंडर जारी किया है। यह टेंडर 4 सितंबर, 2026 को प्रकाशित किया गया था, जिसमें लोकल विकास के लिए एक लचीला वेव गाइड सेक्शन की मांग की गई है, जो रडार सिस्टम का एक महत्वपूर्ण घटक है।
यह विकास भारतीय नौसेना के स्वदेशी क्रिटिकल कंपोनेंट्स के विकास के लिए एक स्थिर प्रयास का हिस्सा है, जिसमें फ्रेगेट एम2ईएम रडार के क्रिटिकल कंपोनेंट्स के स्वदेशी क्रिएशन के लिए काम किया जा रहा है। नौसेना ने टालवर-क्लास फ्रिगेट्स पर इस्तेमाल होने वाले फ्रेगेट एम2ईएम रडार के क्रिटिकल कंपोनेंट्स के स्वदेशीकरण के लिए एक घटक-स्तरीय स्वदेशीकरण प्रयास शुरू किया है।
टेंडर में मूल रूसी पार्ट रेफरेंस का उपयोग नौसेना के स्वदेशीकरण के दृष्टिकोण को दर्शाता है। सिर्फ रिप्लेसमेंट कंपोनेंट्स की आपूर्ति करने के बजाय, भारतीय उद्योग को रडार के व्यक्तिगत घटकों के लिए स्वदेशी विकल्प विकसित करने के लिए कहा जा रहा है। यह दृष्टिकोण भारत की टालवर-क्लास फ्रिगेट्स की लंबे समय तक रखरखाव को बढ़ावा देगा।
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कार्बन फाइबर देखें →भारतीय नौसेना ने विफल फ्रेगेट एम2ईएम मॉड्यूल्स के लिए मरम्मत क्षमता की खरीद की है, और नौसेना ने फ्रेगेट वेव गाइड्स की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए भारतीय कंपनियों को अनुबंध दिया है। हाल ही का टेंडर स्वदेशी निर्माण और रूसी घटकों पर निर्भरता को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है।
जीपीईएम की व्यक्तिगत आवश्यकताएं मुख्य नौसेना अधिग्रहण कार्यक्रमों की तुलना में छोटी हैं, लेकिन वे अधिक परिणामी हैं, क्योंकि वे फ्रेगेट रडार सिस्टम के क्रिटिकल कंपोनेंट्स को संबोधित करते हैं। यह दृष्टिकोण स्वदेशीकरण को बड़े प्रतिस्थापन कार्यक्रम की प्रतीक्षा किए बिना कैसे पursued किया जा सकता है, यह भी दर्शाता है।
जो जहाज कई वर्षों के लिए सेवा में होंगे, क्रिटिकल कंपोनेंट्स के लिए भारतीय स्रोत बनाने से विदेशी स्पेयर्स पर निर्भरता को कम करने और लंबे समय तक रखरखाव को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। भारतीय नौसेना के स्वदेशीकरण के प्रयास न केवल देश की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देंगे, बल्कि विदेशी घटकों की खरीद के वित्तीय बोझ को भी कम करेंगे।
स्वदेशी रडार घटकों के विकास से भारत के नौसेना संपत्तियों की सुरक्षा भी बढ़ेगी। फ्रेगेट एम2ईएम रडार टालवर-क्लास फ्रिगेट्स का एक महत्वपूर्ण घटक है, और इसके स्वदेशी विकास से नौसेना को क्रिटिकल कंपोनेंट्स के लिए एक विश्वसनीय और आत्मनिर्भर आपूर्ति स्रोत हासिल होगा।
निष्कर्ष में, भारतीय नौसेना के फ्रेगेट एम2ईएम रडार सिस्टम के क्रिटिकल कंपोनेंट्स के स्वदेशीकरण के प्रयास एक महत्वपूर्ण कदम है आत्मनिर्भरता और सुरक्षा की ओर। स्वदेशी रडार घटकों के विकास से भारत की नौसेना संपत्तियों की लंबे समय तक रखरखाव में सुधार होगा और विदेशी स्पेयर्स पर निर्भरता कम होगी।
मुख्य बिंदु
- भारतीय नौसेना ने फ्रेगेट एम2ईएम एयर-सーチ रडार के एक महत्वपूर्ण घटक के स्वदेशी विकास के लिए एक टेंडर जारी किया है।
- टेंडर में लोकल विकास के लिए एक लचीला वेव गाइड सेक्शन की मांग की गई है, जो रडार सिस्टम का एक महत्वपूर्ण घटक है।
- भारतीय नौसेना ने टालवर-क्लास फ्रिगेट्स पर इस्तेमाल होने वाले फ्रेगेट एम2ईएम रडार के क्रिटिकल कंपोनेंट्स के स्वदेशीकरण के लिए एक घटक-स्तरीय स्वदेशीकरण प्रयास शुरू किया है।
- स्वदेशीकरण के दृष्टिकोण में मूल रूसी पार्ट रेफरेंस का उपयोग किया जा रहा है, जो भारतीय उद्योग को रडार के व्यक्तिगत घटकों के लिए स्वदेशी विकल्प विकसित करने के लिए कह रहा है।
- स्वदेशी रडार घटकों के विकास से भारत की नौसेना संपत्तियों की सुरक्षा और लंबे समय तक रखरखाव में सुधार होगा।
- भारतीय नौसेना के स्वदेशीकरण के प्रयास न केवल देश की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देंगे, बल्कि विदेशी घटकों की खरीद के वित्तीय बोझ को भी कम करेंगे।
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