भारतीय सेना की विमान सेवा का उड़ान भरना स्वदेशी नवाचार से
आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली का निर्माण
भारतीय वायु सेना की सैन्य विमानिकी में आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाने के लिए संकल्प नामक कार्यशाला एक महत्वपूर्ण कदम है। यह कार्यशाला भारतीय वायु सेना और सोसायटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की गई थी। यह कार्यशाला नई दिल्ली में आयोजित की गई थी, जहां भारतीय वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने उन्नत रक्षा पोर्टफोलियो को प्रदर्शित किया और मिशन-आधारित एयरोस्पेस हार्डवेयर के लिए स्वदेशी मरम्मत, रखरखाव और लाइफसाइकिल-सहायता समाधानों की महत्ता को उजागर किया।
संकल्प कार्यशाला ने सैन्य ऑपरेटरों और घरेलू रक्षा निर्माताओं के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य किया, जिससे उद्योग की क्षमताओं को सीधे भारतीय वायु सेना की आधुनिकीकरण और रखरखाव के लक्ष्यों से जोड़ा गया। भारतीय वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारियों, जिनमें एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित, वाइस चीफ ऑफ द एयर स्टाफ और एयर मार्शल संजीव घुरतिया, एयर ऑफिसर-इन-चार्ज मेंटेनेंस शामिल थे, ने सैमटेल टीम के साथ जुड़कर स्थानीय रखरखाव मॉडलों की आवश्यकता को उजागर किया। ये मॉडल सैन्य बलों को सक्षम करेंगे कि वे सक्रिय फ्लीट पर तैनात उच्च-तकनीकी विमानिकी और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की सेवा, मरम्मत और अपग्रेड कर सकें, बिना विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं पर निर्भर हों।
राजेश नारंग, सैमटेल एचएल डिस्प्ले सिस्टम्स के सीईओ और बिजनेस डेवलपमेंट के प्रमुख, ने औपचारिक पैनल चर्चाओं के दौरान महत्वपूर्ण उद्योग दृष्टिकोण प्रस्तुत किए। एयर मार्शल अनिल चोपड़ा द्वारा संचालित, सिडीएम के रणनीतिक सलाहकार, इस सत्र ने इलेक्ट्रॉनिक घटकों की मजबूत रखरखाव, उन्नत डिस्प्ले, सurveilance सिस्टम और टैक्टिकल कम्युनिकेशन जीअर के लिए ध्यान केंद्रित किया। नारंग ने स्मूथ मेंटेनेंस पाइपलाइन को स्ट्रीमलाइन करने और लंबे समय तक ऑपरेशनल रेडीनेस सुनिश्चित करने के लिए स्मूथ पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप की आवश्यकता को उजागर किया।
संकल्प कार्यशाला भारतीय वायु सेना की आत्मनिर्भरता के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है। स्वदेशी क्षमताओं में निवेश करके, कंपनियों जैसे कि सैमटेल एवियोनिक्स ने एक मजबूत रक्षा प्रणाली का निर्माण किया है, जो उन्नत एयर कॉम्बेट और सurveilance संपदाओं को भविष्य में भी बनाए रखने में सक्षम होगी। यह स्वदेशी नवाचार की ओर कदम बढ़ाने से न केवल विदेशी सहायता को कम किया जा सकेगा, बल्कि भारतीय वायु सेना को उभरती हुई चुनौतियों और खतरों का प्रभावी ढंग से जवाब देने में भी मदद मिलेगी।
सार्वजनिक-व्यावसायिक सहयोग का महत्व
संकल्प कार्यशाला ने सार्वजनिक-व्यावसायिक सहयोग की महत्ता को उजागर किया है, जिससे मेंटेनेंस पाइपलाइन को स्ट्रीमलाइन किया जा सके और लंबे समय तक ऑपरेशनल रेडीनेस सुनिश्चित किया जा सके। कंपनियों जैसे कि सैमटेल एवियोनिक्स ने इस पहल को आगे बढ़ाया है, जो भारतीय वायु सेना के साथ मिलकर स्वदेशी रखरखाव मॉडलों का विकास और लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
भारतीय सैन्य विमानिकी का भविष्य
संकल्प कार्यशाला ने भारतीय वायु सेना की आत्मनिर्भरता के प्रति प्रतिबद्धता को एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बनाया है। स्वदेशी क्षमताओं में निवेश करके और सार्वजनिक-व्यावसायिक सहयोग के माध्यम से कंपनियों जैसे कि सैमटेल एवियोनिक्स ने एक मजबूत रक्षा प्रणाली का निर्माण किया है, जो उन्नत एयर कॉम्बेट और सurveilance संपदाओं को भविष्य में भी बनाए रखने में सक्षम होगी।
मुख्य बिंदु
- संकल्प कार्यशाला ने मिशन-आधारित एयरोस्पेस हार्डवेयर के लिए स्वदेशी मरम्मत, रखरखाव और लाइफसाइकिल-सहायता समाधानों की महत्ता को उजागर किया है।
- वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने स्थानीय रखरखाव मॉडलों की आवश्यकता को उजागर किया है, जिससे विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं पर निर्भरता कम की जा सके।
- कंपनियों जैसे कि सैमटेल एवियोनिक्स ने स्वदेशी नवाचार की ओर कदम बढ़ाया है, जो भारतीय वायु सेना के साथ मिलकर स्वदेशी रखरखाव मॉडलों का विकास और लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
- सार्वजनिक-व्यावसायिक सहयोग ने मेंटेनेंस पाइपलाइन को स्ट्रीमलाइन करने और लंबे समय तक ऑपरेशनल रेडीनेस सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- संकल्प कार्यशाला ने भारतीय वायु सेना की आत्मनिर्भरता के प्रति प्रतिबद्धता को एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बनाया है, जिससे एक मजबूत रक्षा प्रणाली का निर्माण किया जा सकेगा।
