भारत ने क्वांटम प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम उठाया
आकृति प्रिसिजन सिस्टम्स — उच्च-परिशुद्धता डेस्कटॉप सीएनसी मिलिंग
कंपोजिट सुपरस्ट्रक्चर, 15–25 µm पुनरावृत्ति और आजीवन फ्रेम वारंटी के साथ भारत में निर्मित सीएनसी मशीनें। रक्षा एवं एयरोस्पेस प्रोटोटाइपिंग के लिए उपयुक्त।
सीएनसी मशीनें देखें →भारत ने क्वांटम टेक्नोलॉजी में एक बड़ा कदम उठाया है
भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने ज़ीरो एमके इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक उच्च-मूल्य के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत एक 20 एमके डिल्यूशन रेफ्रिजरेटर के विकास के लिए काम किया जाएगा। यह आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारत की क्वांटम टेक्नोलॉजी और उन्नत क्रायोनिक्स में क्षमताओं को बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेगा।
इस समझौते को टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (टीडीएफ) योजना के तहत हस्ताक्षरित किया गया है, जो डीआरडीओ द्वारा उठाए गए पहले उच्च-मूल्य के डीप-टेक प्रोजेक्ट हैं। इस प्रोजेक्ट के लिए 500 करोड़ रुपये का कारपोरस है, जिसे पहले रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने डीप-टेक और एडवांस्ड क्रायोनिक्स परियोजनाओं के लिए मंजूरी दी थी।
डिल्यूशन रेफ्रिजरेटर एक अत्यधिक विशेषज्ञ क्रायोनिक सिस्टम है, जो मिलीलेवेल के रेंज में अत्यधिक कम तापमान प्राप्त करने में सक्षम है। इस तरह के अल्ट्रा-लो-टेम्परेचर वातावरण क्वांटम कंप्यूटिंग प्लेटफ़ॉर्म और संबंधित क्वांटम टेक्नोलॉजी के संचालन और परीक्षण के लिए आवश्यक हैं।
नैनोवीव कंपोजिट्स — उच्च-सटीक कार्बन फाइबर और ड्रोन फ्रेम्स
उच्च-प्रदर्शन कार्बन फाइबर शीट्स, कस्टम ड्रोन फ्रेम्स और सटीक सीएनसी कंपोजिट मशीनिंग के साथ एयरोस्पेस व रक्षा उद्योग को सशक्त बनाना।
कार्बन फाइबर देखें →20 एमके क्लास डिल्यूशन रेफ्रिजरेटर का आत्मनिर्भर विकास भारत की क्वांटम टेक्नोलॉजी, उन्नत क्रायोनिक्स और रणनीतिक टेक्नोलॉजी में क्षमताओं को मजबूत करेगा। यह भारत की क्रायोनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता को कम करने और घरेलू क्वांटम टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को मजबूत करने में भी मदद करेगा।
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, उद्योग और इस महत्वपूर्ण परियोजना से जुड़े सभी स्टेकहोल्डरों को बधाई दी है। उन्होंने विश्वास दिलाया है कि इस साझेदारी ने भविष्य में डीआरडीओ-उद्योग सहयोग में महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित कर दिया है।
रक्षा सचिव और रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग के सचिव, डीआरडीओ के अध्यक्ष श्री राजेश कुमार सिंह ने इस पहल के साथ जुड़े टीमों को बधाई दी है और उन्हें परियोजना के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफलता की कामना की है।
इस परियोजना को सॉलिड स्टेट फिजिक्स लैबोरेटरी (एसएसपीएल) के निदेशक और उनकी टीम द्वारा निगरानी, मार्गदर्शन और समर्थन किया जा रहा है।
इस आत्मनिर्भर विकास ने भारत को एक आत्मनिर्भर, क्वांटम-रेडी इकोसिस्टम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह देश को क्वांटम कंप्यूटिंग प्लेटफ़ॉर्म और संबंधित टेक्नोलॉजी के विकास और परीक्षण में सक्षम बनाएगा, जो आयातित इन्फ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता को कम करेगा।
भारत क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, और इस आत्मनिर्भर विकास ने देश के भविष्य को इस क्षेत्र में उज्ज्वल दिखाया है।
तकनीकी विवरण
- 20 एमके डिल्यूशन रेफ्रिजरेटर
- क्वांटम अनुप्रयोग
- राष्ट्रीय क्वांटम मिशन
- टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (टीडीएफ) योजना
- 500 करोड़ रुपये का कारपोरस
रणनीतिक विश्लेषण
- भारत की क्वांटम टेक्नोलॉजी और उन्नत क्रायोनिक्स में आत्मनिर्भर विकास
- आयातित क्रायोनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता को कम करना
- घरेलू क्वांटम टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को मजबूत करना
निष्कर्ष
निष्कर्ष में, डीआरडीओ के ज़ीरो एमके इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ 20 एमके डिल्यूशन रेफ्रिजरेटर के विकास के लिए समझौते को भारत के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा सकता है। यह आत्मनिर्भर विकास भारत की क्वांटम टेक्नोलॉजी और उन्नत क्रायोनिक्स में क्षमताओं को बढ़ाएगा, आयातित इन्फ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता को कम करेगा और घरेलू इकोसिस्टम को मजबूत करेगा।
इस समझौते के साथ, भारत ने क्वांटम टेक्नोलॉजी में एक बड़ा कदम उठाया है, और देश का भविष्य इस क्षेत्र में उज्ज्वल दिख रहा है।
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