वैश्विक समुद्री मार्ग पर हमले का खतरा: खाद्य सुरक्षा और मानवीय सहायता पर संकट
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रणनीतिक जानकारी देखें →विश्व के खाद्य आपूर्ति शृंखलाएं खतरे में हैं, संघर्ष और हिंसा के बढ़ते प्रवाह से खतरे में हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत हरिश पार्वतानेनी, ने सुरक्षित और संगठित समुद्री व्यापार मार्गों की आवश्यकता पर ध्यान दिलाया है, जो खाद्य, उर्वरक और ईंधन के बिनब्बतीन आवागमन के लिए आवश्यक हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने चेतावनी दी है कि संघर्ष और हिंसा विश्वभर में भुखमरी के हॉटस्पॉट को बढ़ा रही हैं, कम से कम 266 मिलियन लोगों को गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है। वर्ष 2025 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से सबसे अधिक सशस्त्र संघर्ष देखे गए और वैश्विक गंभीर भूख के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। समुद्री व्यापार मार्गों में व्यवधान खाद्य सुरक्षा पर विनाशकारी प्रभाव डाल सकते हैं, विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए। भारत धान, गेहूं और मक्के जैसे अनाज फसलों पर अधिक निर्भरता से आगाह कर रहा है और मूंगफली जैसे जलवायु प्रतिरोधी फसलों को प्रोत्साहित कर रहा है। देश सुरक्षित और स्वतंत्र नेविगेशन की सुरक्षा के लिए सामूहिक कार्रवाई की मांग कर रहा है, ताकि वाणिज्यिक जहाज और मानवीय शिपमेंट बिना अनुचित बाधा के आगे बढ़ सकें। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों और समुद्री संरचनाओं की सुरक्षा के लिए मिलकर काम करना होगा। यह सुरक्षित, तेज और बाधित मानवीय पहुंच को सुविधाजनक बनाने, सहयोग के व्यवस्था को समर्थन देने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अपने उपायों को शामिल करने की आवश्यकता है, जिसमें प्रतिबंधात्मक योजनाएं शामिल हैं, जो मानवीय सहायता या वैध खाद्य और कृषि व्यापार को अनजाने में बाधित न करें। भारत घरेलू कृषि उत्पादन को मजबूत करने, आपूर्ति शृंखलाओं को विविध बनाने, संग्रहण और लॉजिस्टिक्स संरचनाओं को सुधारने और जलवायु प्रतिरोधी कृषि को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर दे रहा है। उर्वरकों, गुणवत्तापूर्ण बीजों, प्रौद्योगिकी और अनुदानित वित्त के लिए संगठित और सस्ता पहुंच की आवश्यकता है, विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए। खाद्य और कृषि प्रवेशों के लिए खुला, पारदर्शी और नियम-आधारित व्यापार वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए आवश्यक है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को संघर्ष और विकास के मूल कारणों को भी संबोधित करना होगा, जिसमें राजनीतिक अस्थिरता और संसाधनों तक पहुंच की कमी शामिल है। संयुक्त राष्ट्र के हाल के हंगर हॉटस्पॉट रिपोर्ट में दिखाया गया है कि संघर्ष और हिंसा 13 सबसे बड़े चिंता के हॉटस्पॉट में 12 में से प्राथमिक कारक हैं। हॉर्मुज स्ट्रेट में लगभग पांचवां हिस्सा वैश्विक तेल आपूर्ति और एक तिहाई वैश्विक उर्वरक व्यापार होता है। प्रतिबंध और बंदिशें वस्तुओं के दाम बढ़ाने और उपलब्धता में गिरावट लाने के लिए जिम्मेदार हैं। लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले भी खाद्य और अन्य वस्तुओं की आपूर्ति शृंखलाओं को और अधिक खतरे में डाल रहे हैं। भारत को महत्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं, जिसमें खाद्य, उर्वरक, ईंधन और मानवीय लॉजिस्टिक्स शामिल हैं, में व्यवधानों के समयबद्ध आकलन की आवश्यकता है। ऐसे आकलनों को विषयगत, प्रमाण-आधारित और राजनीतिकरण से मुक्त रहना चाहिए। सदस्य राज्यों, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों, क्षेत्रीय संगठनों और विकास भागीदारों को मिलकर काम करके संघर्ष के मानवीय परिणामों को संबोधित करना होगा। निष्कर्ष में, विश्व के खाद्य आपूर्ति शृंखलाएं खतरे में हैं, जो संघर्ष और हिंसा के बढ़ते प्रवाह से खतरे में हैं। भारत सुरक्षित और स्वतंत्र नेविगेशन की सुरक्षा के लिए सामूहिक कार्रवाई की मांग कर रहा है, और वाणिज्यिक जहाजों और मानवीय शिपमेंट को बिना अनुचित बाधा के आगे बढ़ने की सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है।
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